Essay On Vacation With My Family In Hindi

  • 1. मेरा एक बहुत सुखी परिवार है|
  • 2. मेरे पिता का नाम राहुल वेंकटेश& है|
  • 3.वह  एक इंजीनियर है|
  • 4. मेरी मां का नाम सीमा वेंकटेश है|
  • 5. वह एक घर में पत्नी है|
  • 6. मेरी  एक बड़ी बहन है|
  • 7. मैं अपने दादा - दादी के साथ खेलता हूँ |
  • 8. मेरे पापा मुझे गणित , विज्ञान और कंप्यूटर पढ़ते हैं |
  • 9. मेरी माँ और मेरी दादी मेरे साथ कभी कभी खेलती हैं|
  • 10. मेरी माँ अच्छे अच्छे  खाने बनाती हैं |
  • 11. मै  अपने दादा के साथ क्रिकेट खेलता हूँ |
  • 12. हम सब मिलकर कभी कभी सिनेमा देखने जाते हैं |
  • 13. मेरे दादा दादी मुझे बहुत प्यार करते है |
  • 14. हम लोगों का एक छोटा सा घर है|
  • 15. हम सब एक साथ बहुत खुश है |

अध्यापकों के अत्याचार से पूरे परिवार वाले थोड़ी सी परेशानी में आ जाते हैं । बच्चों को निबंद के बारे में यदि थोडा समझा देते और उसके बाद में कोई भी निबन्ध का विषय देते तो ठीक रहता । इस तरह से हर दिन एक नया निबन्ध कैसे बच्चा  लिखेगा ।

इस तरह का discussion बहुत से अभिभावकों  द्वारा सुना गया है । उनके इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए यह website  बनाया गया है । लेकिन आप से मेरा अनुरोध है की पहले अपने बच्चों से अपने से लिखने को कहिये. । ताकि आप उसकी कमजोरी  को समझ सके । 

Mera Parivar Essay in Hindi

छुट्टी का दिन पर निबंध / Essay on Holiday in Hindi!

छुट्‌टी का दिन आम तौर पर खुशी का दिन होता है । यह फुर्सत और आराम का दिन होता है । यह घर के लंबित कामों को निबटाने का दिन होता है । यह दोस्तों से मिलने तथा परिचितों का कुशल-समाचार लेने का दिन होता है । इस तरह छुट्‌टी का दिन मोटे तौर पर एक सुविधाजनक दिन होता है ।

आज का जीवन तनावयुक्त हो गया है । खासकर शहरों में कामकाजी लोग स्वयं को तनावयुक्त स्थिति में पाते हैं । हर समय काम ही काम । दफ्तर का काम और घर का काम । तनाव कम होने का नाम ही नहीं लेता । ऐसे में छुट्‌टी का दिन परेशानियों को कुछ दूर कर देता है । लोगों को आराम मिलता है और तनाव दूर हो जाता है । विद्‌यार्थी अपने लंबित गृहकार्य निबटाते हैं, वे अपनी किताबों को व्यवस्थित करते हैं । बड़े ऑफिस की कुछ फाइलें निबटा लेते हैं । घर के लोग खराब पड़ी मशीनों की मरम्मत करवा लेते हैं । कुछ लोग रिश्तेदारों का हाल-चाल पूछने उनके घर चले जाते हैं । कामकाजी महिलाएं छुट्‌टी के दिन अपने घर की चीजों को व्यवस्थित करती हैं । कमीज का बटन टूट गया हो या चाय की छलनी टूट गई हो इस दिन सब दुरुस्त हो जाता है ।

छुट्‌टी का दिन साफ-सफाई की दृष्टि से बहुत महत्त्व रखता है । दैनिक कार्यक्रम में व्यस्त रहने पर घर की अच्छी तरह सफाई नहीं हो पाती । घर की दीवारों पर मकड़े का जाला पड़ा होता है । घर के कोने में गंदगी का जमाव कोई असामान्य बात नहीं है । घर की नालियों में कचरा जमा हो सकता है । छुट्‌टी के दिन ये सब साफ कर लिए जाते हैं । महिलाएँ इस दिन कपड़ों की सफाई कर लेती हैं । बर्तन भी अच्छी तरह साफ हो जाते हैं । जूतों को पालिश कर चमका लिया जाता है । सफेद बाल काले कर लिए जाते हैं और शरीर की अच्छी सफाई कर ली जाती है । बड़े हुए नाखूनों को काटने का भी आज अच्छा अवसर होता है ।

छुट्‌टी का दिन है तो कुछ मनोरंजन भी चाहिए । आज टेलीविजन पर मनपसंद कार्यक्रम नहीं छुट पाएँगे । आज क्रिकेट या फुटबॉल मैच का आयोजन करने में कोई हिचक नहीं । आज के दिन मित्रों को भोजन पर बुलाने में कोई हर्ज नहीं । छुट्‌टी का दिन हर एक को शौक पूरा करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है । चाहे तो कोई पतंग उड़ा ले या बाहर घूम-फिर आए । यदि लगातार कई दिन की छुट्‌टी हो तो पर्यटन या सैर-सपाटे का कार्यक्रम भी बनाया जा सकता है । इससे देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त होगी और मन की ऊब मिटेगी ।

ऐसा नहीं कि छुट्‌टी के दिन सब अच्छी- अच्छी बातें ही होती हैं । छुट्‌टी लंबी हो तो ऊब हो जाती है । छुट्‌टी में बच्चे पढ़ाई से ध्यान हटाकर बस टेलीविजन से चिपक जाते हैं । दफ्तर में कुछ काम- धाम न करनेवालों को छुट्‌टी का दिन और निठल्ला बना देता है । जब रोज आराम ही हो तो छुट्‌टी का क्या मतलब! जब रोज ही छुट्‌टी हो तो छुट्‌टी के दिन से क्या प्रयोजन! छुट्‌टी उन लोगों के लिए वरदान है जो रात-दिन काम में जुटे रहते हैं । छुट्‌टी उन लोगों के लिए अभिशाप है जो प्रतिदिन ही आरामतलब जिंदगी जीते हैं ।

छुट्‌टी का दिन सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने तथा सामाजिक कार्यों को करने का अच्छा अवसर प्रदान करता है । इस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सार्वजनिक समारोहों तथा सम्मेलनों में भाग लिया जा सकता है । इस दिन घर के आस-पडोस की सफाई कर पर्यावरण सुधार में मदद की जा सकती है । इस दिन वृक्षारोपण के अभियान चलाए जा सकते हैं । बाग-बगीचों के पौधों को सींचा जा सकता है । यदि कोई काम नहीं हो तो दीन-दुखियों की मदद के लिए कुछ कार्य करने चाहिए । परोपकार के सभी कामों से आत्म-संतुष्टि मिलती है । इसलिए छुट्‌टी का दिन व्यर्थ नहीं बिताना चाहिए । बैठे-बैठे थकने से काम करते-करते थकना अधिक अच्छा है ।

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